Mata Pita ki Seva – Inspirational Story in Hindi

आज हम एक बहुत ही ज़रुरी, बहुत ही Important Aspect Mata Pita ki Seva – Inspirational Story in Hindi के बारे में बात करेंगे जो आपकी तरक्की के लिए आपकी सफलता के लिए बहुत ज़्यादा ज़रुरी है  बाकी सारी चीज़ें इसके बाद आती है

हमारे माता-पिता भगवान का ही रूप होते हैं।  भगवान ने हमारी रक्षा के लिए हमारे माता-पिता को भेजा है।

माता-पिता की सेवा भगवान की ही सेवा है।  माता-पिता की सेवा से भगवान खुश होते हैं।  माता-पिता के क़दमों में स्वर्ग होता है, उनके आशीर्वाद से हमें हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

माता-पिता की सेवा Motivational Story In Hindi

पता नहीं कैसे पत्थर की मूर्ति के लिए
जगह बना लेते है घर मैं वो लोग,
जिनके घर में माता-पिता के लिए कोई स्थान नहीं होता है….!!

 

Mata Pita ki Seva Inspirational Story in Hindi

Mata Pita ki Seva Inspirational Story in Hindi



दोस्तों ! Hindiasha.com मे एक बार फिर से आपक सभी का स्वागत है ।

 

क्या आपको पता है संसार का सुन्दरतम शब्द क्या है? …………………….. सबसे प्यारा शब्द क्या है? ………………

क्या जानते हैं आप?

 

सबसे प्यारा, सबसे सुन्दरतम शब्द संसार में है – “माँ”   Very Beautiful  इसमें इतनी मीठास भरी हुई है ! माँ का पूरा स्नेह, पूरा प्यार……. ! माँ या पिता, यानि दोनों का प्यार ।   माँ और पिता का जो दर्जा है वो सचमुच देवताओं से भी कहीं बढ़कर है ।

हमने परमात्मा को नहीं देखा, हमने भगवान को नहीं देखा, लेकिन हमने अपने माता-पिता को साकार देखा है ।  हमारे माता-पिता इस संसार में हमारे लिए भगवान का ही रूप हैं ।  परमात्मा इस सृष्टि का पालन-पोषण करता है, यह हम जानते हैं ।


लेकिन वो किस ज़रिये से करता है, किस तरीके से करता है? हमारे लिए उनकी Representation, परमात्मा का Direct Manifestations हमारे माँ और बाप हैं ।

हमारे शास्त्रों में माता-पिता के लिए कहा जाता है – “मातृ देवो: भव:”, माँ देवता के समान है । “पितृ देवो: भव:”, पिता देवता के समान है और “आचार्य देवो: भव:”, हमारे जो teachers हैं वो देवता के समान हैं ।

दोस्तो मे आज आपको इसी Aspect पर माता-पिता की सेवा Motivational Story लिख रहा हु ।

एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था, उस पर मोटे-मोटे अक्षरो से लिखा हुआ था…..!!

” घर मे कोई नही है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना,दवा और सफाई कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल ले और पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें, साथ ही रेट भी लिखे हुये हैं ”

और अगर आपके पास पैसे नही हो तो मेरी तरफ से ले लेना, इजाजत है..!

मैंने इधर उधर देखा, पास पड़े तराजू में दो किलो सेब तोले, दर्जन भर केले लिए, बैग में डाले, प्राइज लिस्ट से कीमत देखी, पैसे निकाल कर गत्ते को उठाया वहाँ सौ पच्चास और दस दस के नोट पड़े थे, मैंने भी पैसे उसमे रख कर उसे ढक दिया। बैग उठाया और अपने फ्लैट पे आ गया, फिर शाम के बाद मैं और भाई उधर निकले तो देखा एक कमज़ोर सा आदमी दाढ़ी आधी काली आधी सफेद, मैले से कुर्ते पजामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर बस जाने ही वाला था ,वो हमें देख कर मुस्कुराया और बोला “साहब! फल तो खत्म हो गए


नाम पूछा तो बोला शामू फिर हम सामने वाले ढाबे पर बैठ गए…
चाय आयी, कहने लगा “पिछले तीन साल से अम्मा बिस्तर पर हैं, कुछ पागल सी भी हो गईं है, और अब तो लकवा भी हो गया है, मेरी कोई औलाद नही है,बीवी मर गयी है, सिर्फ मैं हूँ और अम्मा..!

अम्मा की देखभाल करने वाला कोई नही है इसलिए मुझे हर वक़्त अम्मा का ख्याल रखना पड़ता है”

एक दिन मैंने अम्मा का पाँव दबाते हुए बड़ी नरमी से कहा, “अम्मा! तेरी देखभाल को तो बड़ा जी चाहता है। पर जेब खाली है और तू मुझे कमरे से बाहर निकलने नही देती,कहती है तू जाता है तो जी घबराने लगता है,तू ही बता मै क्या करूँ?”

अब क्या गले से खाना उतरेगा? मै बोला अम्मा न “मैं कोई बडा व्यपारी हूँ न तू किसी राजा की माँ है.”

*ये सुन कर अम्मा ने हाँफते काँपते उठने की कोशिश की, मैंने तकिये की टेक लगवाई, उन्होंने झुर्रियों वाला चेहरा उठाया अपने कमज़ोर हाथों को भगवान के आगे जोडा ,और न जाने भगवान से क्या बात की, फिर बोली…

“तू रेहड़ी वहीं छोड़ आया कर हमारा पैसा हमे इसी कमरे में बैठ कर मिलेगा” “मैंने कहा अम्मा क्या बात करती हो,

वहाँ छोड़ आऊँगा तो कोई चोर उचक्का सब कुछ ले जायेगा, आजकल कौन लिहाज़ करता है? और बिना मालिक के कौन खरीदने आएगा? ”

कहने लगीं “तू सुबह आरती के बाद रेहड़ी को फलों से भरकर छोड़ कर आजा बस,ज्यादा बक बक नही कर,शाम को खाली रेहड़ी ले आया कर, अगर तेरा रुपया गया तो मुझे बोलियो” ढाई साल हो गए है भाई!

इसे भी पढिए – Success Story in Hindi खेतो मे मजदूरी से आईटी कंपनी तक की यात्रा

 

सुबह रेहड़ी लगा आता हूँ शाम को ले जाता हूँ, लोग पैसे रख जाते है फल ले जाते हैं, एक धेला भी ऊपर नीचे नही होता, बल्कि कुछ तो ज्यादा भी रख जाते है, कभी कोई अम्मा के लिए फूल रख जाता है, कभी कोई और चीज़! परसों एक बच्ची पुलाव बना कर रख गयी साथ मे एक पर्ची भी थी “अम्मा के लिए” एक डॉक्टर अपना कार्ड छोड़ गए पीछे लिखा था अम्मा की तबियत नाज़ुक हो तो मुझे काल कर लेना मैं आजाऊँगा, कोई खजूर रख जाता है रोजाना कुछ न कुछ मेरे पैसे के साथ मौजूद होता है।
न अम्मा हिलने देती है न भगवान रुकने देता है, अम्मा कहती है तेरा फल भगवान देवताओ से बिकवा देता है।

आखिर में इतना ही कहूँगा की अपने मां बाप की सेवा करो देखना ,दुनिया की सभी कामयाबियाँ कैसे हमारे क़दम चूमती है ।

अतः माता-पिता की सेवा स्वयं भगवान की सेवा है। इसलिए हमें अपने माता-पिता की हर बात का आदर करते हुए, उनके आदेशों का पालन करना चाहिए।

यह कहानी आप अपने मित्रो ,परिवार के सदस्यो के साथ शेयर जरुर करे, उम्मीद करता हूँ  आपको यही कहानी पसंद आई होगी, आप अपने विचार या सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स  मे लिख सकते है ।


2 Comments

  • बहुत ही बेहतरीन आर्टिकल है। धन्यवाद जो हमें ऐसे पोस्ट से अवगत कराया।

    • धन्यवाद ! आपके सराहनीय कमेंट हमे और भी अच्छे लेख लिखने के लिए प्रेरित करती है ….Keep Visit

Leave a Comment

कृपया प्रतीक्षा करे

Latest अपडेट प्राप्त करे

Hindiasha की नयी पोस्ट की अपडेट के लिए सब्सक्राइब करे
%d bloggers like this: