Success Story in Hindi खेतो मे मजदूरी से आईटी कंपनी तक की यात्रा

 Inspiring Success Story in Hindi


क्या खेतों में मजदूरी करने वाला कोई शख्स आईटी कंपनी का CEO बन सकता है ?

बहुत से लोगों को यह बात मुमकिन नहीं लगती है लेकिन ऐसा उदाहरण हमारे अपने देश में है। 

ज्योति रेडी  Success Story in Hindi खेतो मे मजदूरी से आईटी कंपनी तक की यात्रा कर अपना भाग्य खुद लिखा।

ज्योति रेड्डी कभी खेतों में मजदूरी कर पांच रुपए कमाती थी आज उनकी पहचान आईटी कंपनी  “Key Sotware Solutions ” की सीईओ के रूप में है। 

 

Success Story in Hindi खेतो मे मजदूरी से आईटी कंपनी तक की यात्रा

Success Story in Hindi खेतो मे मजदूरी से आईटी कंपनी तक की यात्रा


ज्योति रेड्डी का जन्म 1 9 70 में एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार मे हुआ था।

उनके परिवार की आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण उनको एक अनाथालय में भेज दिया गया।

अनाथाश्रम में ढेरों बच्चों के बीच पलती ज्योति अपने घरवालों से दूर कष्ट और बेचारगी की जीवन जीने को मजबूर हुई।

इसी दौरान ज्योति ने अपनी मेहनत से अनाथाश्रम की सुपरिटेंडेंट का दिल जीता और सुपरिटेंडेंट ने उसे अपने घर बर्तन साफ करने और सफाई करने के काम पर लगा लिया।


सुपरिटेंडेंट के घर पर रहकर ज्योति अनाथाश्रम में मिले सारे कष्ट भूल जाया करती थी। वो दिल लगाकर काम करती और सुपरिटेंडेंट की तरह बड़ा बनने का सपना देखती।

यहां रहकर ज्योति ने सरकारी स्कूल से दसवीं पास की और टाइपराइटिंग भी सीखी।

ज्योति दसवीं पास करके एक नौकरी के सपने देखने लगी थी ताकि अपने घर लौटकर घरवालों की मदद कर सके।

लेकिन घर जाते ही उनके माता-पिता ने 16 साल की आयु में उनका विवाह कर दिया। 

उनके सारे सपने चूर चूर हो गए। समय बीतता गया ……… और ज्योति 18 वर्ष की आयु में 2 बच्चों की मां बन गई।

उनके लिए अपने बच्चों को खाना खिलाना और देखभाल करना जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करना बहुत मुश्किल था। अपने बच्चों के लिए ज्योति ने खेतों में 5रुपए प्रति दिन मेहनताने पर काम किया ।


ज्योति ने 1986 से 1989 तक के खेतों में मेहनत की और उनकी जिंदगी में एक मोड़ ऐसा आया जब उनको  अपने सपने पूरे होते दिखाई देने लगे । 

 

 

सफलता का केवल एक ही रहस्य है साधारण चीजों को साधारण तरीके से करना

 

 

1989 में नेहरू युवक केंद्र (NYC) ने गावों में वयस्कों को शिक्षा देने के लिए रात्रिकालीन विद्यालयों की शुरुआत की क्योंकि उनके गांव में कोई भी इतना पढ़ा लिखा नहीं था तो एक मात्र विकल्प ज्योति थी तो उन्हें यह अवसर प्राप्त हुआ

 

 

ज्योति ने स्वयं सेवक के रूप में यह कार्य चालू किया और ज्योति ने अपनी मेहनत और लगन से अधिक से अधिक लोगों को शिक्षित किया । 

निरीक्षण अधिकारी ज्योति की मेहनत और लगन से प्रभावित होकर उन्हें उनके क्षेत्र का मंडल प्रेरक नियुक्त कर दिया ।

मंडल प्रेरक बना दिए जाने के बाद ज्योति ने क्षेत्र के सभी केंद्रों का दौरा किया और उंहें तब शिक्षा के महत्व का एहसास हुआ कि बिना उच्च शिक्षा के वह अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ सकती

इसलिए उन्होंने आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की।

 

ज्योति को इस दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा अपने पति और बच्चों को साथ लेकर वह अलग-अलग स्थानों पर निरंतर अपने कार्य में लगी रही और अधिक से अधिक पैसा बनाने की कोशिश करती रही।

ये समस्याएं भारतीय ग्रामीण महिलाओं के लिए एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने से भी कहीं ज्यादा कठिन होती है।

जब ज्योति स्कूल निरीक्षक के तौर पर कार्य कर रही थी तब ज्योति अमेरिका से लौटे अपने एक परिचित से मिली।

ज्योति को अहसास हुआ कि बच्चियों की बेहतर परवरिश और सामाजिक तानों बानों से अलग विदेश में तरक्की की संभावनाएं ज्यादा हैं।



ज्योति ने अमेरिका जाने का सपना देखना शुरू किया। उसने सबसे पहले कंप्यूटर चलाना सीखा और अमेरिका के लिए वीजा पासपोर्ट की कोशिश करने लगी।

साल भर में कई बार नाकाम होने के बाद आखिरकार ज्योति अमेरिका के लिए विजिटिंग वीजा पाने में कमयाब हो ही गई।

 

अमेरिका पहुंचते ही सबसे ज्यादा धक्का तब लगा जब उसके परिचित ने उसे अपने घर पर शरण देने से इनकार कर दिया। एक अनजाने देश मे ज्योति को तब एक गुजराती परिवार ने पेइंग गेस्ट के रूप में शरण दी।

 

जीवन यापन के लिए ज्योति ने न्यूजर्सी में एक वीडियो शॉप में सेल्सगर्ल की नौकरी की। यहां ज्योति के जज्बे को देखकर एक भारतीय व्यक्ति ने उसे CSAMERICA  नामक कंपनी में रिक्रूटर की जॉब ऑफर की।

 

ज्योति ने कुछ समय यहां काम किया और जल्द ही ICSA नामक कंपनी से उसे बेहतर पैकेज पर जॉब ऑफर मिली। ज्योति ने बिना सोचे ये ऑफर स्वीकार ‌कर लिया।

लेकिन ज्योति पर तब मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा जब कुछ ही दिन बाद ICSA  ने यह कहते हुए ज्योति को नौकरी से निकाल दिया कि उसके पास अमेरिका में वर्किंग वीजा(Working Visa) नहीं है।

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नौकरी छोड़ने के बाद वर्किंग वीजा पाने में कई महीने लग गए और ये समय ज्योति के लिए बहुत दुखदायी था । ज्योति ने इस दौरान गैस स्टेशन पर काम किया और बेबी सिटिंग तक की।

वर्किंग वीजा पाने के लिए ज्योति मैक्सिको गई और वहां भी वीजा पाने में कई पापड़ बेलने पड़े। तब ज्योति को अहसास हुआ कि वीजा पाने की कोशिशों में वो इतना पेपरवर्क कर चुकी है कि अपनी कंसलटेंसी फर्म तक खोल सकती है।

उसने तय किया कि नौकरी की बजाय अपने बिजनेस में हाथ आजमाया जाए।

अगर आप कभी भी हार नहीं मानते तो आपके पास एक और मौका होता है जीतने का हार मान लेना सबसे बड़ी हार है

 

ज्योति 2001 में अपने बिजनेस के सपने के साथ वर्किंग वीजा लेकर फिर अमेरिका लौटी और अपनी बचत के 40000 डॉलर से  एक दफ्तर खोला।

 

कंसलटेंसी फर्म चल निकली उसके बाद ज्योति ने  KEY सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन नामक सॉफ्टवेयर कंपनी स्थापित की। आज ये कंपनी अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनियों को आईटी सपोर्ट दे रही है।



रिलायंस और सरेक्स जैसी बड़ी कंपनियां KEYS की क्लाइंट हैं।

ज्योति की कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में आता है और कंपनी में सैंकड़ों लोग काम करते हैं। ज्योति की बेटियां भी अमेरिका में सैटल हो चुकी हैं। ज्योति की कं‌पनियां फोनिक्स, न्यूजर्सी और एरिजोना में हैं।

ज्योति अमेरिका में ही जाकर नहीं बस गई। वो समय समय पर भारत आती हैं और यहां समाजसेवी काम करती हैं।

 

हैदराबाद, दिल्ली और चेन्नई में अनाथाश्रम को आर्थिक मदद करती हैं। वारंगल में KEYS के सहयोग से लड़कियों को शिक्षा प्रदान करने संबंधी प्रोजेक्ट चल रहा है।

ज्योति अमेरिका में “LEAD INDIA 2020 FOUNDATION”  की सदस्य हैं जो युवा और मेहनती भारतीयों की दिक्कतें दूर कर उन्हें बेहतर जीवन यापन के लिए सहयोग करता है।

दोस्तों यह एक साधारण महिला की असाधारण कहानी है उम्मीद करता हूं आपको पसंद आई होगी

 

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